Ashadh Gupt Navaratra 2020 | विक्रम सम्वत २०७७, आषाढ़, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा (२२ जून २०२०)

    आषाढ़ मास की (गुप्त) नवरात्र [आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (२२ जून २०२०) सोमवार​]

जय माँ काली जय श्री राम​

पाठकों मैं आपके लिए (जो भक्त​ शक्ति/प्रकृति के उपासक हैं उनके लिए) एक मह्त्वपुर्ण जानकारी लेकर आया हूँ जिससे कि आप सभी को अवश्य लाभ लेना चाहिए।

शक्ति की उपासना करने वालों के लिए माँ जगदम्बा की अराधना का यह सुनहरा अवसर है, क्योंकि COVID-19 के कारण इस समय जब कि अधिकतर लोग घर से ही काम कर रहे हैं, तो कार्यालय आने जाने में जो समय बच रहा है उस समय का सदुपयोग माँ जगदम्बा की अराधना के लिए करें।

हमारे देश में देवी को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, नवरात्र भी इनमें से एक है। लेकिन लोग सिर्फ दो नवरात्र (चैत्र व शारदीय) के विषय में ही जानते हैं। इनके अलावा दो और नवरात्र (आषाढ़ और माघ) भी होते हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। इन्हें गुप्त नवरात्र भी कहते हैं।

आषाढ़ मास की (गुप्त) नवरात्रि इस बार​ २२ जून २०२० से २९ जून २०२० तक है।

गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ मास में आते हैं। भारतीय पञ्चाङ्ग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक को आषाढ़ (गुप्त​) नवरात्री के रूप में जाना जाता है।  इसके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती, इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं।

गुप्त नवरात्र विशेष कर​ गुप्त सिद्धियां पाने का सबसे उचित समय होता है। साधक इन दोनों गुप्त नवरात्र में विशेष साधना करते हैं और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त करते हैं।

इस इस वर्ष की पहली आषाढ़ मास गुप्त नवरात्री अङ्ग्रेजी पञ्चाङ्ग के अनुसार २२ जून (सोमवार) २०२० से २९ जून (सोमवार) २०२० तक रहेगी।

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जिसके लिए घट स्थापना आदि का समय इस प्रकार है 



सोमवार २२ जून २०२० को (यह समय भारत की राजधानी दिल्ली के अनुसार है यदि आप किसी और स्थान के लिए मुहुर्त देख रहे हैं तो उसके लिए उस स्थान विशेष का पञ्चाङ्ग देखें।)

घट स्थापना मुहूर्त  - प्रातः ०५:२४ से ०७:१२ तक​ (अवधि ०१ घण्टा ४८ मिनट)

घट स्थापना अभिजित मुहूर्त प्रातः ११:५५ से अपराह्न १२:५१ तक (अवधि – 00 घण्टे ५६ मिनट)

वैसे तो प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ सोमवार २१ जून को अपराह्न १२:११ से २२ जून प्रातः ११:५९ तक​ (कृपया ध्यान दें कि २१ जून २०२० को अपराह्न ०१:४९ तक सुर्यग्रहण भी है, जिसका सूतक २० जून के रात्री ०९:५२ से आरम्भ हो रहा है।)

नवरात्री की अन्य तिथियाँ इस प्रकार हैं:-

1- प्रतिपदा तिथि २२ जून २०२०, सोमवार

     घटस्थापना, कलश स्थापना, एवं शैलपुत्री पूजा

2- द्वितीया तिथि २३ जून २०२०, मंगलवार​

     ब्रह्मचारिणी पूजा एवं  भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा भी है

3- तृतीया तिथि २४ जून २०२०, बुधवार​

     चन्द्रघण्टा पूजा

4- चतुर्थी तिथि २५ जून २०२०, गुरूवार​

      कुष्माण्डा पूजा   

5- पञ्चमी तिथि / षष्ठी तिथि २६ जून २०२०, शुक्रवार​

      स्कन्दमाता पूजा एवं कत्यायिनी पूजा 

6- सप्तमी तिथी  – २७ जून २०२०, शनिवार​

     कालरात्री पूजा

7- अष्टमी तिथि २८ जून २०२०, रविवार

     दुर्गा अष्टमी, महागौरी एवं सन्धि पूजा 

8- नवमी तिथि २९ जून २०२०, सोमवार

     सिद्धिदात्री पूजा, नवरात्री हवन

9- दशमी तिथि ३० जून २०२०, मंगलवार​

     नवरात्रि पारण

ये हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूप-

नवरात्रि में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री, इन नौ स्वरूपों की विशेष पूजा अलग-अलग दिन की जाती है।

क्यों विशेष है गुप्त नवरात्र?

गुप्त नवरात्र में वामाचार (तंत्र-मंत्र) पद्धति से उपासना की जाती है। यह समय शाक्त (महाकाली की पूजा करने वाले) एवं शैव ( भगवान शिव की पूजा करने वाले) के लिए विशेष होता है।

गुप्त नवरात्र में संहारक देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है। ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं।

कब-कब आती है नवरात्र?

सनातन धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्र होती है। वर्ष के प्रथम मास अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्र होती है। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र होती है। इसके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्र होती है। इसी प्रकार वर्ष के ग्यारहवें महीने अर्थात माघ में भी गुप्त नवरात्र मनाने का उल्लेख एवं विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

अश्विन मास की नवरात्र सबसे प्रमुख मानी जाती है। इस दौरान गरबों के माध्यम से माता की आराधना की जाती है। दूसरी प्रमुख नवरात्र चैत्र मास की होती है। इन दोनों नवरात्रियों को क्रमश: शारदीय व वासंती नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है।

आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्र गुप्त रहती है। इसके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती। इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। गुप्त नवरात्र विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है। साधक इन दोनों गुप्त नवरात्र में विशेष साधना करते हैं और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त करते हैं।

गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के प्रयोग

अश्विन और चैत्र माह में आने वाली नवरात्रि में जहां भगवती के नौ स्वरूपों की आराधना होती है, वहीं, गुप्त नवरात्र में देवी के दश महाविद्या स्वरूप की आराधना भी की जाती है।

मार्कण्‍डेय पुराण में मनुष्‍य जाति की रक्षा के लिए एक परम गुप्‍त, परम उपयोगी और मनुष्‍य का कल्‍याणकारी देवी कवच एवं व देवी सुक्‍त बताया गया है। जो मनुष्‍य इन उपायों को करेगा, वह इस संसार में सुख भोग कर अन्‍त समय में बैकुण्‍ठ को जाएगा।

ब्रह्मदेव​ ने कहा कि जो मनुष्‍य श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलेगा।

देवीभागवत​ के अनुसार माँ जगदम्‍बा का अवतरण श्रेष्‍ठ पुरूषो की रक्षा के लिए हुआ है और श्रीमददेवीभागवत के अनुसार वेदों और पुराणों कि रक्षा के और दुष्‍टों के दलन के लिए हुआ है। इसी तरह से ऋगवेद के अनुसार माँ दुर्गा ही आद्या शक्ति है, उन्हीं से सारे विश्‍व का संचालन होता है और उनके अलावा और कोई अविनाशी नहीं है।

इसीलिए नवरात्रि के दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों का ध्‍यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्रि के प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है।

नवरात्रि के दौरान श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ को अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण माना गया है। इस दुर्गा सप्‍तशती को ही शतचण्डि, नवचण्डि अथवा चण्डि पाठ भी कहते हैं और रामायण के दौरान लंका पर चढाई करने से पहले भगवान राम ने इसी चण्‍डी पाठ का आयोजन किया था, जो कि शारदीय नवरात्रि के रूप में आश्विन मास की शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथी तक आज भी होती है।

जैसा कि पहले बताया था पूरे वर्ष​ में कुल ४ नवरात्री होती हैं, जिनमें से दो नवरात्रियों को गुप्‍त नवरात्रि कहा जाता है, जिसका महत्व मुख्यतः मन्त्र व तन्त्र साधकों के लिए अधिक होता है जबकी अन्य दो नवरात्री का महत्व गृहस्थ भक्तों (जिन्हें सुख​, समृद्धि, वैभव व सामाजिक प्रतिष्ठा की अभिलाषा होती है) के लिए अधिक होता है। वैसे गुप्त नवरात्री में भी गृहस्थ माँ की अराधना कर सकते हैं, ऐसा कोई निषेध नहीं है।

दर्शकों अन्‍य दो नवरात्रियों में भी शारदीय नवरात्रि का ज्‍यादा महत्‍व अधिक इसलिए है क्‍योंकि देवताओं ने इस मास में ही देवी की अराधना की थी, जिसके परिणामस्‍वरूप मां जगदम्‍बा ने दैत्‍यों का वध कर देवताओं को पुनः स्‍वर्ग पर अधिकार दिलवाया था।

मार्कण्डेय​ पुराण के अनुसार नवरात्रि के दौरान माँ के जिन नौ शक्तियों की पूजा-आराधना की जाती है, उनके नाम व संक्षिप्‍त महत्‍व इस प्रकार से है-

माँ का शैल पुत्री रूप, जिनकी उपासना से मनुष्‍य को अन्‍नत शक्तियां प्राप्‍त होती हैं तथा उनके आध्‍यात्मिक मूलाधार च्रक का शोधन होकर उसे जाग्रत कर सकता है, जिसे कुण्‍डलिनी-जागरण भी कहते है।

 

माँ का ब्रहमचारणी रूप, तपस्‍या का प्रतीक है। इसलिए जो साधक तप करता है, उसे ब्रहमचारणी की पूजा करनी चाहिए।

च्रदघण्‍टा, माँ का तीसरा रूप है और माँ के इस रूप का ध्‍यान करने से मनुष्‍य को लौकिक शक्तियाँ प्राप्‍त होती हैं, जिससे मनुष्‍य को सांसारिक कष्‍टों से छुटकारा मिलता है।


माँ दुर्गा की चौथी शक्ति का नाम कूष्‍माण्‍डा है और माँ के इस रूप का ध्‍यान, पूजन व उपासना करने से साधक को रोगों यानी आधि-व्‍याधि से छुटकारा मिलता है।

माँ जगदम्‍बा के स्‍कन्‍दमाता रूप को भगवान कार्तिकेय की माता माना जाता है, जो सूर्य मण्‍डल की देवी हैं। इसलिए इनके पुजन से साधक तेजस्‍वी और दीर्घायु बनता है।

कात्‍यानी, माँ दुर्गा की छठी शक्ति का नाम है, जिसकी उपासना से मनुष्‍य को धर्म, अर्थ, काम और अन्‍त में मोक्ष, चारों की प्राप्ति होती है। यानी माँ के इस रूप की उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाऐं पूरी होती हैं।

माँ दुर्गा की सातवीं शक्ति का नाम कालरात्रि है, जिसका अर्थ काल यानी मुत्‍यृ है और माँ के इस रूप की उपासना मनुष्‍य को मुत्‍यृ के भय से मुक्ति प्रदान करती है तथा मनुष्‍य के ग्रह दोषों का नाश होता है।


आठवी शक्ति के रूप में माँ दुर्गा के महागौरी रूप की उपासना की जाती है, जिससे मनुष्‍य में देवी सम्‍पदा और सद्गुणों का विकास होता है और उसे कभी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पडता।

सिद्धिदात्री, माँ दुर्गा के नौ रुपों में अन्तिम शक्ति का नाम है जो कि नवरात्रि के अन्तिम दिन पूजी जाती हैं और नाम के अनुरूप ही माँ सिद्धीदात्री, मनुष्‍य को समस्‍त प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं जिसके बाद मनुष्‍य को किसी और प्रकार की आवश्यक्ता नही रह जाती।

इस विडियो की अगली कड़ी में माँ के अन्य रूपों व शक्ति की महत्ता से सम्बन्धित कथाएँ लेकर आउँगा, तब तक के लिए स्वस्थ रहिए मस्त रहिए एवं परिवार सहित सनातन शास्त्रों का अध्ययन करते रहिए।

जय माँ काली जय श्री राम


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