॥धर्मो रक्षति रक्षितः॥ जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है।
॥धर्मो रक्षति रक्षितः॥ जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है। धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥१५॥ मनुस्मृति अध्याय ८ , मन्त्र १५ हिन्दी अनुवादः नष्ट हुआ धर्म ही व्यक्ति को मारता है तथा रक्षित किया गया धर्म व्यक्ति की रक्षा करता है। इसलिए नष्ट हुआ धर्म कहीं हमें मार न डाले यही विचार कर कभी भी धर्म का हनन नहीं करना चाहिए , अर्थात उसकी रक्षा करनी चाहिए ॥१५॥ वृषो हि भगवान्धर्मस्तस्य यः कुरुते ह्यलम्। वृषलं तं विदुर्देवास्तस्माद्धर्मं न लोपयेत्॥१६॥ मनुस्मृति अध्याय ८ , मन्त्र १६ हिन्दी अनुवाद : धर्म ही वस्तुतःसुख एवं ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है। जो व्यक्ति उसका हनन करता है , ( धर्म के विरोध में कार्य करता है)। देवता लोग उसे धर्म का उच्छेदक समझते हैं। इसलिए कभी भी धर्म को विनष्ट नहीं करना चाहिए॥१६॥ एक एव सुहृद्धर्मो निधनेऽप्यनुयाति यः। शरीरेण समं नाशं सर्वमन्यद्धि गच्छति ॥१७॥ मनुस्मृति अध्याय ८ , मन्त्र १७ हिन्दी अनुवादः वस्तुतः धर्म ही एकमात्र ऐसा मित्र होता है , जो मृत्यु होने पर भी व्यक्ति के साथ जात है ; ...